अंबेडकराइट बौद्धिस्ट एसोसिएशन ऑफ टेक्सास द्वारा यूएसए में महाबोधि इंटरनेशनल बौद्ध सेंटर के भव्य उद्घाटन की घोषणा - Ambedkarite People's Voice

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Thursday, May 28, 2026

अंबेडकराइट बौद्धिस्ट एसोसिएशन ऑफ टेक्सास द्वारा यूएसए में महाबोधि इंटरनेशनल बौद्ध सेंटर के भव्य उद्घाटन की घोषणा

अंबेडकराइट बौद्धिस्ट एसोसिएशन ऑफ टेक्सास द्वारा यूएसए में महाबोधि इंटरनेशनल बौद्ध सेंटर के भव्य उद्घाटन की घोषणा



गारलैंड, टेक्सास : अंबेडकराइट बौद्ध एसोसिएशन ऑफ टेक्सास (ABAT) के द्वारा महाबोधि इंटरनेशनल बौद्ध सेंटर के भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया जायेगा। यह ऐतिहासिक केंद्र भारत के बेंगलुरु स्थित महाबोधि सोसाइटी की संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थापित पहली होने वाली शाखा होगा।
 
यह ऐतिहासिक अवसर शनिवार, 4 जुलाई 2026 को आयोजित किया जाएगा, जो कि संयुक्त राज्य अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के साथ एक विशेष संयोग है। यह आयोजन स्वतंत्रता, समानता, करुणा और विविध समुदायों के बीच एकता का प्रतीक बनेगा।
 
महाबोधि इंटरनेशनल बौद्ध सेंटर को भगवान बुद्ध के उपदेशों — ध्यान, सतर्कता (माइंडफुलनेस), करुणा, सामाजिक सद्भाव और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर से प्रेरित शांति एवं मानव गरिमा के मूल्यों — के संरक्षण और प्रसार हेतु समर्पित आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
 
इस भव्य उद्घाटन समारोह में विश्वभर से विविध परंपराओं एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 20 से अधिक बौद्ध भिक्षुओं के सम्मिलित होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य देशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं अतिथि भाग लेंगे। यह आयोजन विशेष रूप से भारतीय, श्रीलंकाई, नेपाली, बर्मी, थाई, वियतनामी तथा अमेरिकी बौद्ध एवं अंबेडकरवादी समुदायों को एक मंच पर लाएगा।
 
प्रख्यात बौद्ध आचार्य वेन. भंते कस्सप तथा वेन. भंते आनंद विशेष रूप से बेंगलुरु, भारत से इस समारोह में भाग लेने एवं आशीर्वचन प्रदान करने के लिए पहुंचेंगे।इस आयोजन में गारलैंड शहर के स्थानीय गणमान्य नागरिकों एवं प्रशासनिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति भी अपेक्षित है।
 
ABAT के पदाधिकारियों ने कहा कि महाबोधि इंटरनेशनल बौद्ध सेंटर की स्थापना उत्तर अमेरिका में ध्यान, शिक्षा, सामाजिक समानता तथा बौद्ध सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए एक स्थायी आध्यात्मिक केंद्र के निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।आयोजकों ने कहा कि“यह केंद्र केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि करुणा, प्रज्ञा, सामाजिक न्याय और वैश्विक सद्भाव का प्रतीक है।

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