मुरादाबाद में बाबा साहब के सम्मान पर बवाल: फ्लेक्सी बोर्ड हटाने पर सड़कों पर उतरा दलित समाज, महिलाओं ने भी संभाला मोर्चा - Ambedkarite People's Voice

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Tuesday, June 16, 2026

मुरादाबाद में बाबा साहब के सम्मान पर बवाल: फ्लेक्सी बोर्ड हटाने पर सड़कों पर उतरा दलित समाज, महिलाओं ने भी संभाला मोर्चा

मुरादाबाद में बाबा साहब के सम्मान पर बवाल: फ्लेक्सी बोर्ड हटाने पर सड़कों पर उतरा दलित समाज, महिलाओं ने भी संभाला मोर्चा


मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद की तहसील ठाकुरद्वारा अंतर्गत ग्राम नूरपुर में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सम्मान में लगाए गए फ्लेक्सी बोर्ड को हटाने के प्रयास को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया।

जानकारी के अनुसार ग्राम नूरपुर, थाना डिलारी, पुलिस चौकी जलालपुर क्षेत्र में बिजली के खंभे पर काफी समय से बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का फ्लेक्सी बोर्ड लगा हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि यह बोर्ड महापुरुष के प्रति सम्मान और उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से लगाया गया था। हालांकि कुछ लोगों की आपत्ति के बाद इसे हटाने की कोशिश किए जाने की सूचना सामने आई, जिससे गांव में तनाव का माहौल बन गया।

घटना की जानकारी मिलते ही अम्बेडकरवादी समाज के लोग बड़ी संख्या में मौके पर एकत्रित हो गए। महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई और कहा कि बाबा साहब ने समाज को शिक्षा, समानता और संवैधानिक अधिकारों की राह दिखाई है, इसलिए उनके सम्मान से जुड़े किसी भी प्रतीक को हटाने का प्रयास समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के आत्मसम्मान, सामाजिक न्याय और अधिकारों के प्रतीक हैं। उनका सम्मान पूरे देश के वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। इसलिए ऐसे मामलों में प्रशासन को संवेदनशीलता और संतुलन के साथ निर्णय लेना चाहिए।

ग्रामीणों ने लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखते हुए प्रशासन से अपील की कि बाबा साहब के सम्मान से जुड़े मामलों में समाज की भावनाओं का पूरा सम्मान किया जाए और बिना सहमति के किसी प्रकार की कार्रवाई न की जाए। प्रदर्शनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध नहीं, बल्कि संविधान निर्माता के सम्मान और सामाजिक स्वाभिमान की रक्षा करना है।

फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि वे बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों और सम्मान की रक्षा के लिए भविष्य में भी संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करते

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