तब इंसान बन जाओगे---
दर्द है किसी बात का
समझलो इसका उपचार ।
रखो बुद्धि विवेक चैतना
है जीवन के यही हथियार।।
रूक मत, चल और दोड।
गुलामी की अब जंजीरें तोड। ।
कभी ये समझ मे आयेगा।
समझेगा अगर इसको अभी
तब तो इंसान बन जायेगा ।।
कर अब भी दिमांगी खोज।
रस्मे दिखावा है केवल बोझ।।
बढेगा वही आगे।
जो ज्ञान विज्ञान और तर्क से जागे।।
अंधविश्वास आडम्बर की आदत पडी है।
इसमे मानसिक, आर्थिक
शोषण और धोखाधड़ी है।।
सादगी अपना।
अपने को सिधा सरल,नम्र बना।।
सम्मान और शांति पा।
तो इंसान बन जायेगा।।
जाति धर्म सम्प्रदाय से बढ आगे।
चल सदाचार, मानवता की राह पर
अंहकार छोड
दिमांग मे हर कुछ मत जोड।।
कर मत फिजूल खर्च
मत पहन आर्थिक बोझ।
कर मत दिखावा
मत रख गलत आचरण व्यवहार ।।
मत छीन किसी का बचपन
मत करा बाल मजदूरी।
मत उलझ सामाजिक कुप्रथाओ में
मत बढा मजबूरी। ।
मदन सालवी ओजस्वी
स्वतंत्र लेखक राजस्थान

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