महात्मा बसवेश्वर जयंती उत्साह के साथ मनाई गई; समता और मानवता का जागरण
वसमत: यहाँ शहर में महात्मा बसवेश्वर की जयंती बड़े उत्साह और मंगलमय वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर महापुरुषों के विचारों का स्मरण कर समाज प्रबोधन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत संबोधि बुद्ध विहार में गौतम बुद्ध, महात्मा बसवेश्वर महाराज और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय बौद्ध महासभा के शहराध्यक्ष मेजर भगवान सूर्यतळ ने की। इस अवसर पर मुख्याध्यापक सुनील काळे, बालाजी मोरे, नामदेव इंगोले तथा समतादूत मिलिंद आळणे प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
प्रगतिशील विचारों की विरासतवक्ताओं ने अपने संबोधन में बसवेश्वर के क्रांतिकारी कार्यों पर प्रकाश डाला। रघुपति सरोदे ने कहा कि, “बसवेश्वर ने 12वीं शताब्दी में ही जाति उन्मूलन का आंदोलन अपने आचरण से शुरू किया था। उनके विचार वर्धमान महावीर और गौतम बुद्ध के दर्शन से मेल खाते हैं।”
समता और बंधुता: बसवेश्वर द्वारा प्रतिपादित मानवता के विचार आज भी समाज को दिशा देते हैं।वैचारिक विद्रोह: तत्कालीन विषम व्यवस्था के विरुद्ध उनका संघर्ष और इष्टलिंग धर्म का प्रतिपादन बुद्ध के विचारों से मिलता-जुलता है। त्याग: सामाजिक मूल्यों के लिए उन्होंने अपने प्रधान पद का त्याग किया, जो अत्यंत प्रेरणादायी है।
नागरिकों की उत्स्फूर्त भागीदारी
इस कार्यक्रम में दौलतदार गजभार सर, चौरे साहब, डॉ. नामदेव मुळे, खंडोजी पंडित सर, साहेबराव सरोदे सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने महात्मा बसवेश्वर के कार्यों को नमन कर उनके विचारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन नंद सर ने किया।

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