“उमड़ती भीड़ नहीं, बहुजन जागरण की लहर, चंदशेखर आज़ाद की रैलिया मेँ जनसैलाब” - Ambedkarite People's Voice

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Sunday, March 29, 2026

“उमड़ती भीड़ नहीं, बहुजन जागरण की लहर, चंदशेखर आज़ाद की रैलिया मेँ जनसैलाब”

                 “उमड़ती भीड़ नहीं, बहुजन जागरण की लहर, चंदशेखर आज़ाद की रैलिया मेँ जनसैलाब”



आज देश का माहौल तेजी से बदल रहा है। जो समाज कभी चुप था, जिसे वर्षों तक दबाकर रखा गया, वह आज खुलकर अपने अधिकारों की बात कर रहा है। यह बदलाव यूँ ही नहीं आया है—इसके पीछे संघर्ष है, जागरूकता है और संगठन की ताकत है। भीम आर्मी (आज़ाद समाज पार्टी) आज उसी बदलाव का प्रतीक बनकर उभरी है, जिसने बहुजन समाज को सिर्फ आवाज ही नहीं दी बल्कि उसे एक मजबूत दिशा भी दी है।


रैलियों में उमड़ती भीड़ आज सिर्फ भीड़ नहीं है, यह एक संदेश है। यह बताती है कि अब बहुजन समाज जाग चुका है, अब वह अपने अधिकारों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहता। जब हजारों-लाखों लोग एक साथ सड़कों पर उतरते हैं, तो वह किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे समाज के आत्मसम्मान का प्रतीक बन जाता है। यही कारण है कि इस बढ़ती ताकत को देखकर कई राजनीतिक दलों के भीतर बेचैनी साफ दिखाई देती है।


आज जो लोग इस आंदोलन को हल्के में लेने की कोशिश कर रहे हैं, वे यह भूल रहे हैं कि यह कोई क्षणिक लहर नहीं है। यह एक दीर्घकालिक सामाजिक बदलाव की शुरुआत है। भीम आर्मी ने हमेशा शिक्षा, संगठन और संघर्ष को अपना आधार बनाया है। यही तीन स्तंभ आज बहुजन समाज को मजबूती दे रहे हैं। जब समाज शिक्षित होगा, संगठित होगा और अपने हक के लिए संघर्ष करेगा, तब कोई भी ताकत उसे पीछे नहीं धकेल सकती।


कुछ लोग इस बढ़ती भीड़ को देखकर इसे भ्रमित करने की कोशिश करते हैं, इसे राजनीतिक स्टंट बताते हैं या इसे गलत दिशा में ले जाने की साजिश करते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि यह भीड़ अब जागरूक है। यह सिर्फ नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने अधिकारों, अपने संविधान और अपने भविष्य को लेकर गंभीर है। यह नई पीढ़ी की भीड़ है, जो सवाल भी पूछती है और जवाब भी मांगती है।


मैं, शिवशांत गौतम, भीम आर्मी (आज़ाद समाज पार्टी) का एक जिम्मेदार कार्यकर्ता होने के नाते, अपने सभी साथियों से कहना चाहता हूँ कि यह समय सिर्फ उत्साह दिखाने का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने का है। हमें अपने आंदोलन को और मजबूत बनाना है। हर गांव, हर कस्बे और हर शहर में जाकर लोगों को जागरूक करना है। उन्हें बताना है कि उनका अधिकार क्या है और उसे कैसे हासिल किया जा सकता है।


हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है जो वर्षों से बहुजन समाज को उसके अधिकारों से वंचित करती आई है। हमारा लक्ष्य सत्ता हासिल करना भर नहीं है, बल्कि एक ऐसा समाज बनाना है जहाँ हर व्यक्ति को समान अवसर मिले, जहाँ किसी के साथ भेदभाव न हो और जहाँ संविधान की मूल भावना को पूरी ईमानदारी से लागू किया जाए।


आज जरूरत है एकजुटता की। हमें आपसी मतभेदों को भूलकर एक साथ खड़ा होना होगा। जो ताकतें हमें बांटना चाहती हैं, उन्हें पहचानना होगा और उनके मंसूबों को नाकाम करना होगा। जब हम एकजुट होंगे, तभी हम मजबूत होंगे और तभी हम अपने लक्ष्य को हासिल कर पाएंगे


लेखक : शिवशांत गौतम

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