डांगावास हत्याकांड के फैसले के विरोध में सड़क पर उतरे भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी और मेघवाल समाज के कार्यकर्ता
प्रदर्शनकारियों ने निचली अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि करीब 11 वर्षों तक चले विचारण के बाद 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया, जबकि डांगावास कांड में छह लोगों की मौत हुई थी। कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि सभी आरोपी निर्दोष हैं तो फिर छह लोगों की हत्या किसने की, यह सवाल आज भी अनुत्तरित है।
फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की मांग
ज्ञापन में राजस्थान सरकार से मांग की गई कि डांगावास प्रकरण में आए फैसले के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में अपील की जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि फैसले के बाद पीड़ित परिवारों और समाज के लोगों में न्याय व्यवस्था को लेकर असुरक्षा और अविश्वास की भावना पैदा हुई है।
पीड़ित परिवारों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग
कार्यकर्ताओं ने डांगावास हत्याकांड के पीड़ित परिवारों की सुरक्षा बढ़ाने की भी मांग की। उनका कहना है कि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान पीड़ित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
न्यायिक फैसले को लेकर भी उठाए सवाल
ज्ञापन में विशेष न्यायालय एससी/एसटी एक्ट, मेड़ता नागौर के पीठासीन अधिकारी आशीष बिजारणियां (ए.जे.एस.) द्वारा दिए गए फैसले पर भी आपत्ति जताई गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि फैसला आरोपियों के पक्ष में एकतरफा रहा। हालांकि, यह प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोप हैं और अंतिम रूप से मामले में न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही इसका निर्धारण होगा।
18 मांगों पर बनी थी सहमति, अब तक पूरी नहीं होने का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि डांगावास घटना के समय सरकार के साथ 18 मांगों को लेकर सहमति बनी थी। उनका आरोप है कि सीबीआई जांच को छोड़कर अन्य मांगों में से कई मांगें आज तक पूरी नहीं हुई हैं।
ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मांग की गई कि उस समय किए गए समझौते के तहत सभी मांगों को पूरा किया जाए, ताकि पीड़ित परिवारों और समाज के लोगों में यह विश्वास कायम हो सके कि कानून और सरकार उनके साथ खड़े हैं।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे।
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